मंगल दोष क्या है?
मंगल दोष — जिसे मांगलिक दोष, कुजा दोष या भोम दोष भी कहते हैं — तब बनता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो। कुछ परंपराओं में केवल 1, 4, 7, 8, 12 भावों को मानते हैं।
मंगल ऊर्जा, क्रोध, साहस और आक्रामकता का कारक ग्रह है। उपरोक्त भावों में उसकी स्थिति विवाह और जीवनसाथी के संबंध में कुछ तनाव या चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती है।
मंगल दोष कब रद्द होता है?
कई परिस्थितियों में मंगल दोष का प्रभाव स्वतः कम या समाप्त हो जाता है:
• यदि मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो • यदि कुंडली में बृहस्पति लग्न में हो या मंगल पर दृष्टि डाले • यदि दोनों पक्षों में मंगल दोष हो (मांगलिक मांगलिक से विवाह) • यदि मंगल लग्नेश हो (वृश्चिक या मेष लग्न) • 28 वर्ष की आयु के बाद कई ज्योतिषी मंगल दोष का प्रभाव कम मानते हैं • चंद्र लग्न से देखने पर दोष न बने
इसलिए किसी भी निष्कर्ष से पहले पूरी कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है।
मंगल दोष के उपाय
मंगल दोष शांति के लिए प्रचलित उपाय:
• मंगलवार का व्रत और हनुमान जी की पूजा • हनुमान चालीसा का नियमित पाठ • मंगल मंत्र: 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का 108 बार जाप • लाल मसूर या लाल कपड़े का दान मंगलवार को • कुजा दोष निवारण पूजा — विशेषकर विवाह से पहले • मूंगा (Red Coral) रत्न — लेकिन केवल ज्योतिषी के परामर्श से
याद रखें — मंगल दोष एक खगोलीय संयोग है, कोई अभिशाप नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मांगलिक व्यक्ति केवल मांगलिक से विवाह कर सकता है?
यह अनिवार्य नहीं है। यदि मांगलिक व्यक्ति का साथी गैर-मांगलिक है तो उचित उपाय और ज्योतिषीय परामर्श से विवाह संभव है।
मंगल दोष की जाँच कैसे करें?
अपनी कुंडली में मंगल की स्थिति देखें। यदि मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12 भाव में हो तो मंगल दोष है। हमारे कुंडली मिलान टूल से आसानी से जाँच सकते हैं।