हिंदू चंद्र कैलेंडर

तिथि कैलेंडर

महीने के हर दिन सूर्योदय पर प्रचलित तिथि — आपके स्थान के अनुसार, पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, प्रदोष और संकष्टी की तिथियाँ व सटीक समाप्ति समय सहित। पूरे वर्ष के लिए वार्षिक दृश्य देखें।

अगस्त 2026
Varanasi (Kashi), India
मास: श्रावण – भाद्रपद
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
🌑 द्वितीया
शुक्ल पक्ष · श्रावण मास
सूर्योदय 05:31 AM
द्वितीया 06:49 PM तक, फिर तृतीया

इस माह के व्रत व पर्व

30 तिथियाँ — नाम व महत्व

तिथि चांद्र मास का तीसवाँ भाग है — जितने समय में चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। प्रत्येक चांद्र मास में शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियाँ होती हैं; नाम दोहराए जाते हैं — पंद्रहवीं तिथि शुक्ल में पूर्णिमा और कृष्ण में अमावस्या होती है। हर तिथि के देवता निर्धारित हैं और वह पाँच स्वभावों में से एक की होती है, जिससे उस दिन के योग्य कार्य तय होते हैं।

नंदा — आनंदभद्रा — कल्याणजया — विजयरिक्ता — रिक्तपूर्णा — पूर्ण
#तिथिदेवतास्वभावमहत्व व प्रमुख व्रत-पर्व
1प्रतिपदाअग्निनंदाशुभारंभ और प्रतिष्ठा कार्य; प्रत्येक पक्ष का पहला दिन।
2द्वितीयाब्रह्माभद्रानींव के कार्य — गृह प्रवेश, आधारशिला, विद्यारंभ।
3तृतीयागौरीजयाअधिकांश कार्यों हेतु अति शुभ; अक्षय तृतीया व तीज इसी तिथि पर।
4चतुर्थीगणेशरिक्तागणेश व्रत (विनायक, संकष्टी); नए कार्यों से बचा जाता है।
5पंचमीनागपूर्णाविद्या और कला — वसंत पंचमी, नाग पंचमी।
6षष्ठीकार्तिकेयनंदास्वास्थ्य व संतान — छठ और स्कंद षष्ठी व्रत।
7सप्तमीसूर्यभद्रासूर्य उपासना, यात्रा और आरोग्य कार्य।
8अष्टमीशिवजयादेवी व भैरव उपासना — दुर्गाष्टमी, जन्माष्टमी, कालाष्टमी।
9नवमीदुर्गारिक्ताशक्ति उपासना — राम नवमी, महानवमी; नए आरंभ टाले जाते हैं।
10दशमीयमपूर्णापूर्णता और विजय — विजयादशमी, गंगा दशहरा।
11एकादशीविष्णुनंदाविष्णु का व्रत-दिन — वर्ष में 24 एकादशी व्रत।
12द्वादशीविष्णुभद्राएकादशी पारण, विष्णु पूजा, दान।
13त्रयोदशीकामदेवजयाशिव का प्रदोष व्रत; धनतेरस कृष्ण त्रयोदशी को।
14चतुर्दशीकालीरिक्ताशिव-काली उपासना — शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी; अन्य कार्य वर्जित।
15🌕 पूर्णिमाचंद्रपूर्णापूर्ण चंद्र — सत्यनारायण कथा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, कार्तिक पूर्णिमा।
15 / 30🌑 अमावस्यापितृपूर्णाअमावस — पितृ कार्य (श्राद्ध, तर्पण), दीपावली, मौनी अमावस्या।

ऊपर का कैलेंडर बताता है कि आपके स्थान पर किस दिन कौन-सी तिथि है — स्थानीय सूर्योदय पर प्रचलित तिथि ही उस दिन की तिथि मानी जाती है। इसीलिए एक ही तारीख को अलग-अलग शहरों में तिथि भिन्न हो सकती है, और कभी कोई तिथि दोहराती (वृद्धि) या लुप्त (क्षय) हो जाती है।