तिथि कैलेंडर
महीने के हर दिन सूर्योदय पर प्रचलित तिथि — आपके स्थान के अनुसार, पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, प्रदोष और संकष्टी की तिथियाँ व सटीक समाप्ति समय सहित। पूरे वर्ष के लिए वार्षिक दृश्य देखें।
इस माह के व्रत व पर्व
30 तिथियाँ — नाम व महत्व
तिथि चांद्र मास का तीसवाँ भाग है — जितने समय में चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। प्रत्येक चांद्र मास में शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियाँ होती हैं; नाम दोहराए जाते हैं — पंद्रहवीं तिथि शुक्ल में पूर्णिमा और कृष्ण में अमावस्या होती है। हर तिथि के देवता निर्धारित हैं और वह पाँच स्वभावों में से एक की होती है, जिससे उस दिन के योग्य कार्य तय होते हैं।
| # | तिथि | देवता | स्वभाव | महत्व व प्रमुख व्रत-पर्व |
|---|---|---|---|---|
| 1 | प्रतिपदा | अग्नि | नंदा | शुभारंभ और प्रतिष्ठा कार्य; प्रत्येक पक्ष का पहला दिन। |
| 2 | द्वितीया | ब्रह्मा | भद्रा | नींव के कार्य — गृह प्रवेश, आधारशिला, विद्यारंभ। |
| 3 | तृतीया | गौरी | जया | अधिकांश कार्यों हेतु अति शुभ; अक्षय तृतीया व तीज इसी तिथि पर। |
| 4 | चतुर्थी | गणेश | रिक्ता | गणेश व्रत (विनायक, संकष्टी); नए कार्यों से बचा जाता है। |
| 5 | पंचमी | नाग | पूर्णा | विद्या और कला — वसंत पंचमी, नाग पंचमी। |
| 6 | षष्ठी | कार्तिकेय | नंदा | स्वास्थ्य व संतान — छठ और स्कंद षष्ठी व्रत। |
| 7 | सप्तमी | सूर्य | भद्रा | सूर्य उपासना, यात्रा और आरोग्य कार्य। |
| 8 | अष्टमी | शिव | जया | देवी व भैरव उपासना — दुर्गाष्टमी, जन्माष्टमी, कालाष्टमी। |
| 9 | नवमी | दुर्गा | रिक्ता | शक्ति उपासना — राम नवमी, महानवमी; नए आरंभ टाले जाते हैं। |
| 10 | दशमी | यम | पूर्णा | पूर्णता और विजय — विजयादशमी, गंगा दशहरा। |
| 11 | एकादशी | विष्णु | नंदा | विष्णु का व्रत-दिन — वर्ष में 24 एकादशी व्रत। |
| 12 | द्वादशी | विष्णु | भद्रा | एकादशी पारण, विष्णु पूजा, दान। |
| 13 | त्रयोदशी | कामदेव | जया | शिव का प्रदोष व्रत; धनतेरस कृष्ण त्रयोदशी को। |
| 14 | चतुर्दशी | काली | रिक्ता | शिव-काली उपासना — शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी; अन्य कार्य वर्जित। |
| 15 | 🌕 पूर्णिमा | चंद्र | पूर्णा | पूर्ण चंद्र — सत्यनारायण कथा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, कार्तिक पूर्णिमा। |
| 15 / 30 | 🌑 अमावस्या | पितृ | पूर्णा | अमावस — पितृ कार्य (श्राद्ध, तर्पण), दीपावली, मौनी अमावस्या। |
ऊपर का कैलेंडर बताता है कि आपके स्थान पर किस दिन कौन-सी तिथि है — स्थानीय सूर्योदय पर प्रचलित तिथि ही उस दिन की तिथि मानी जाती है। इसीलिए एक ही तारीख को अलग-अलग शहरों में तिथि भिन्न हो सकती है, और कभी कोई तिथि दोहराती (वृद्धि) या लुप्त (क्षय) हो जाती है।