अनंत चतुर्दशी 2053
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — अनंत सूत्र पूजन व गणेश विसर्जन।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:47
- सूर्यास्त17:51
- व्रत अवधि (तिथि)02:23 → 2053-09-27 · 03:10
- पारण (तिथि समाप्ति)03:102053-09-27
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंअनंत चतुर्दशी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंत चतुर्दशी कब मनाई जाती है?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को, वर्षा ऋतु के अंत में — शुक्ल पक्ष का चौदहवाँ दिन, गणेश चतुर्थी के दस दिन पश्चात। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
अनंत सूत्र क्या है और कैसे बाँधा जाता है?
हल्दी से रँगा सूती या रेशमी धागा, चौदह गाँठों सहित, पूजन के पश्चात भुजा पर अनंत की रक्षा के व्रत रूप में धारण किया जाता है। सामान्य प्रथा में पुरुष दाहिनी और स्त्रियाँ बाईं भुजा पर बाँधती हैं, और पिछले वर्ष का सूत्र पहले उतार दिया जाता है।
इस दिन गणेश विसर्जन क्यों होता है?
अनंत चतुर्दशी गणेशोत्सव का दसवाँ और अंतिम दिन है, जो गणेश चतुर्थी से आरंभ होता है। स्थापित गणेश प्रतिमा को शोभायात्रा में ले जाकर विसर्जित किया जाता है, इस प्रार्थना के साथ कि वे अगले वर्ष पुनः पधारें।
अनंत चतुर्दशी को किस देव की पूजा होती है?
अनंत — विष्णु का अंतहीन रूप, शेषनाग पर शयन करते हुए। व्रत और चौदह-गाँठ का सूत्र दोनों उस असीम का सम्मान करते हैं जो चौदह लोकों को धारण करते हैं।