बैसाखी (मेष संक्रांति) 2037
सौर नववर्ष — पंजाब का फसल पर्व; सूर्य का मेष राशि में प्रवेश।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संक्रांति क्षण04:48
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
बैसाखी (मेष संक्रांति) की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंबैसाखी (मेष संक्रांति) — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बैसाखी कब मनाई जाती है?
सौर मास वैशाख के प्रथम दिन, जो अधिकांश वर्षों में 13 अप्रैल और कुछ में 14 अप्रैल को पड़ता है। सौर पर्व होने से इसकी तिथि प्रायः स्थिर है, चंद्र-पर्वों से भिन्न। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
बैसाखी सिखों हेतु क्यों महत्वपूर्ण है?
1699 की वैसाखी को गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा की स्थापना की, पंज प्यारों को दीक्षित किया और समुदाय को पाँच ककार तथा सिंह-कौर नाम दिए। यह सिख वर्ष के सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिनों में है।
बैसाखी हिंदू पर्व है या सिख?
दोनों, और अधिक। यह एक प्राचीन सौर फसल-पर्व है जो सभी धर्मों में मनाया जाता है और, 1699 से, खालसा का स्थापना-दिवस। वही सौर नववर्ष भारत भर में विषु, पुत्तांडु, पोहेला बोइशाख और बिहू जैसे नामों से मनाया जाता है।
क्या बैसाखी पर व्रत रखा जाता है?
नहीं। बैसाखी फसल और कृतज्ञता का पर्व है, जो गुरुद्वारा पूजा, लंगर और मेले से मनाया जाता है — व्रत से नहीं।