भाई दूज 2051
कार्तिक शुक्ल द्वितीया — यम द्वितीया, भाई-बहन का पर्व।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:07
- अपराह्न मुहूर्त12:48 – 15:01
- व्रत अवधि (तिथि)2051-11-04 · 23:06 → 2051-11-06 · 01:27
- पारण (तिथि समाप्ति)01:272051-11-06
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
भाई दूज की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंभाई दूज — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज कब मनाई जाती है?
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को, शरद ऋतु में — शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन, दीपावली के दो दिन पश्चात। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसकी कथा यम, मृत्यु के देवता, के इस दिन अपनी बहन यमुना से मिलने की है। उसने उनसे यह वरदान पाया कि जो भाई इस दिन बहन का तिलक पाकर उसके घर भोजन करे वह अकाल मृत्यु से मुक्त रहे।
भाई दूज रक्षाबंधन से किस प्रकार भिन्न है?
दोनों भाई-बहन के बंधन का सम्मान करते हैं, किंतु रक्षाबंधन (श्रावण में) बहन के राखी बाँधने पर केंद्रित है, जबकि भाई दूज (दीपावली के पश्चात) बहन के घर और आतिथ्य पर — भाई उसके यहाँ आता है, तिलक पाता है, और उसके बनाए भोजन को ग्रहण करता है।
भाई दूज पर बहन क्या करती है?
वह भाई के मस्तक पर रोली और अक्षत का तिलक लगाती है, आरती करती है, मिष्ठान्न और भोजन कराती है, और उसकी दीर्घायु एवं कल्याण की प्रार्थना करती है। भाई उसे भेंट देकर रक्षा का वचन देता है।