पर्व कैलेंडर
बुद्ध पूर्णिमा 1944
वैशाख पूर्णिमा — बुद्ध का जन्म, बोधि और महापरिनिर्वाण।
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बुद्ध पूर्णिमा 1944 तिथि
सोमवार, 8 मई 1944
तिथि: वैशाख पूर्णिमा
तिथि अवधि: 12:39 PM, रविवार, 7 मई 1944 → 01:04 PM, सोमवार, 8 मई 1944
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:16
- सूर्यास्त18:32
- व्रत अवधि (तिथि)1944-05-07 · 12:39 → 13:04
- पारण (तिथि समाप्ति)13:04
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
बुद्ध पूर्णिमा की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंबुद्ध पूर्णिमा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुद्ध पूर्णिमा को तीन घटनाएँ क्यों पड़ती हैं?
परंपरा मानती है कि बुद्ध का जन्म, बोधि और महापरिनिर्वाण प्रत्येक वैशाख पूर्णिमा को हुआ, यद्यपि वर्षों के अंतर पर — इसीलिए यह एक ही दिन तीनों धारण करता है और बौद्ध वर्ष का सर्वाधिक पवित्र है।
क्या बुद्ध पूर्णिमा हिंदू पर्व भी है?
हाँ। हिंदू बुद्ध को विष्णु का नवाँ अवतार मानते हैं, और यह दिन वैशाख पूर्णिमा से मेल खाता है, जो पवित्र स्नान और दान से रखी जाती है। इसे दोनों परंपराएँ मनाती हैं।
बुद्ध पूर्णिमा को क्या अर्पित होता है?
खीर परंपरागत है — सुजाता के दूध-भात अर्पण का स्मरण — साथ ही श्वेत पुष्प, धूप और दीप। गहन अर्पण अहिंसा, दान और ध्यान है।