पर्व कैलेंडर

चैत्र नवरात्रि प्रारंभ 1988

देवी की नौ रात्रियाँ हिंदू नववर्ष का आरंभ करती हैं; चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना।

इस वर्ष की तिथि देखें — चैत्र नवरात्रि प्रारंभ 2026 कब है
चैत्र नवरात्रि प्रारंभ 1988 तिथि
शुक्रवार, 18 मार्च 1988
तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
तिथि अवधि: 07:32 AM, शुक्रवार, 18 मार्च 1988 → 04:23 AM, शनिवार, 19 मार्च 1988

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)06:03
  • सूर्यास्त18:08
  • व्रत अवधि (तिथि)07:32 → 1988-03-19 · 04:23
  • पारण (तिथि समाप्ति)04:231988-03-19

पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

चैत्र नवरात्रि प्रारंभ की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चैत्र नवरात्रि कब है?

चैत्र की शुक्ल प्रतिपदा से नौ रात्रि, हिंदू चंद्र-वर्ष का प्रथम दिन (गुड़ी पड़वा/उगादी), नवें दिन राम नवमी में समाप्त — प्रायः मार्च के अंत से अप्रैल। इस वर्ष की तिथियाँ ऊपर दी गई हैं; इस पृष्ठ से एक दिन-प्रतिदिन गाइड जुड़ी है।

चैत्र नवरात्रि शारदीय नवरात्रि से कैसे भिन्न है?

दोनों नौ रात्रि दुर्गा के नौ स्वरूपों को पूजती हैं। चैत्र नवरात्रि वसंत में है और राम नवमी (राम-जन्म) में समाप्त होती है; शारदीय नवरात्रि शरद में है और दशहरा (दुर्गा की महिषासुर पर विजय) में। चैत्र हिंदू नववर्ष भी खोलती है।

क्या चैत्र नवरात्रि राम नवमी से जुड़ी है?

हाँ — राम नवमी इसका नवाँ और अंतिम दिन है। देवी की नौ रात्रि नवमी की मध्याह्न में राम-जन्म में ले जाती हैं, अतः दोनों एक सतत अनुष्ठान रूप में रखे जाते हैं।

चैत्र नवरात्रि के व्रत नियम क्या हैं?

व्रत नौ दिन या केवल प्रथम, अंतिम और अष्टमी/नवमी को रखा जा सकता है। अन्न, साधारण नमक, प्याज, लहसुन और मांसाहार त्यागे जाते हैं; कुट्टू, समक, सिंघाड़ा, आलू, फल और सेंधा नमक जैसे व्रत-भोजन लिए जाते हैं।