गुरु नानक जयंती 2044
कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:08
- सूर्यास्त17:15
- व्रत अवधि (तिथि)2044-11-04 · 20:08 → 18:03
- पारण (तिथि समाप्ति)18:03
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
गुरु नानक जयंती की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंगुरु नानक जयंती — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरु नानक जयंती कब मनाई जाती है?
कार्तिक पूर्णिमा को, कार्तिक की पूर्णिमा, शरद ऋतु में। यह गुरपुरब अथवा प्रकाश उत्सव कहलाती है, गुरु नानक के संसार में आगमन का उत्सव। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है?
अखंड पाठ (गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ) से, जो उस दिन प्रातः पूर्ण होता है, अमृत वेला में प्रातःकालीन कीर्तन, पूर्व संध्या पर नगर कीर्तन शोभायात्रा, अरदास, और सबको समान रूप में परोसा जाने वाला लंगर। यह मूर्ति-पूजा या उपवास से नहीं मनाई जाती।
नगर कीर्तन क्या है?
नगर की गलियों में निकाली जाने वाली शोभायात्रा, जिसका नेतृत्व पंज प्यारे और सजी पालकी पर गुरु ग्रंथ साहिब करते हैं, और संगत शबद गाती है। यह गुरपुरब उत्सव का केंद्रीय अंग है।
गुरु नानक ने क्या उपदेश दिया?
ईश्वर की एकता (इक ओंकार) और ईमानदार श्रम (किरत करनी), दूसरों से बाँटने (वंड छकना) तथा नाम-स्मरण (नाम जपना) पर आधारित जीवन, जाति-भेद और खोखले कर्मकांड को अस्वीकार करते हुए।