हरतालिका तीज 2000
शिव हेतु पार्वती की तपस्या — भाद्रपद शुक्ल तृतीया।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:38
- सूर्यास्त18:17
- व्रत अवधि (तिथि)2000-08-31 · 10:35 → 08:47
- पारण (तिथि समाप्ति)08:47
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
हरतालिका तीज की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंहरतालिका तीज — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरतालिका तीज कब मनाई जाती है?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को, वर्षा ऋतु के अंत में — शुक्ल पक्ष का तीसरा दिन, गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
क्या हरतालिका तीज का व्रत सचमुच निर्जल होता है?
परंपरा से हाँ — यह निर्जल व्रत है जो पूरे एक दिन और रात्रि, रात्रि जागरण सहित, अन्न-जल रहित रखा जाता है। जो पूर्ण रूप से न रख सकें वे फल या जल ले सकते हैं, किंतु शास्त्रीय व्रत निर्जल है।
हरतालिका तीज का व्रत कौन रखता है?
विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु और कल्याण हेतु, तथा कुमारी कन्याएँ योग्य वर हेतु रखती हैं। पूजन पार्वती और शिव का साथ-साथ होता है, जिन्हें स्त्रियाँ स्वयं मिट्टी से गढ़ती हैं।
हरतालिका तीज हरियाली तीज से किस प्रकार भिन्न है?
हरियाली तीज श्रावण में पड़ती है और झूले-मेहंदी का हल्का उत्सव है। हरतालिका तीज एक मास पश्चात भाद्रपद में पड़ती है और कठोर निर्जल व्रत तथा पार्वती की तपस्या की कथा पर केंद्रित है।