जगन्नाथ रथ यात्रा 2078
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को पुरी की रथ यात्रा।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)05:14
- सूर्यास्त18:51
- व्रत अवधि (तिथि)2078-07-10 · 13:45 → 12:26
- पारण (तिथि समाप्ति)12:26
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंजगन्नाथ रथ यात्रा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जगन्नाथ रथ यात्रा कब मनाई जाती है?
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को, वर्षा ऋतु के आरंभ में — शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
रथ यात्रा में कौन-से विग्रह विराजते हैं?
तीन: जगन्नाथ (कृष्ण अथवा विष्णु का रूप), उनके ज्येष्ठ भ्राता बलभद्र, और उनकी बहन सुभद्रा। प्रत्येक का पृथक रथ है — नंदिघोष, तालध्वज और दर्पदलन — जो प्रति वर्ष नया बनाया जाता है।
रथ खींचना शुभ क्यों माना जाता है?
इस दिन विग्रह गर्भगृह छोड़कर जनता के पास आते हैं, और कोई भी, किसी भी पद का, रस्सी खींच सकता और खुले में दर्शन कर सकता है। रथ, विशेषतः जगन्नाथ के नंदिघोष, को खींचना महान आशीर्वाद माना जाता है।
रथ यात्रा में विग्रह कहाँ जाते हैं?
पुरी के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक, जो उनकी मौसी का घर अथवा जन्मस्थान माना जाता है, जहाँ वे कुछ दिन रहकर वापसी यात्रा, बाहुड़ा यात्रा, करते हैं।