पर्व कैलेंडर
महाशिवरात्रि 1918
शिव की महान रात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को रात्रि जागरण, व्रत और रुद्राभिषेक।
इस वर्ष की तिथि देखें — महाशिवरात्रि 2026 कब है
महाशिवरात्रि 1918 तिथि
सोमवार, 11 मार्च 1918
तिथि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
तिथि अवधि: 08:52 AM, सोमवार, 11 मार्च 1918 → 05:12 AM, मंगलवार, 12 मार्च 1918
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:10
- निशीथ पूजा (मध्यरात्रि)23:43 – 00:31
- व्रत अवधि (तिथि)08:52 → 1918-03-12 · 05:12
- पारण (तिथि समाप्ति)05:121918-03-12
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंमहाशिवरात्रि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या महाशिवरात्रि पर रात्रि भर जागना चाहिए?
हाँ — जागरण ही व्रत है, उसका पूरक नहीं। पूर्ण विधि में रात्रि के चारों प्रहरों में क्रमशः जल, दही, घी और मधु से अभिषेक किया जाता है।
शिवलिंग पर क्या अर्पित नहीं करना चाहिए?
तुलसी, केतकी पुष्प, हल्दी और नारियल जल वर्जित हैं। बिल्वपत्र, जल, दूध, भंग, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
शिवरात्रि व्रत का पारण कब होता है?
अगले प्रातः, सूर्योदय के पश्चात, और परंपरा से चतुर्दशी तिथि की समाप्ति पर — पूजन के बाद अर्धरात्रि में नहीं।