मकर संक्रांति 2023
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश — पतंग, तिल-गुड़ और पवित्र स्नान का पर्व; दक्षिण भारत में पोंगल।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संक्रांति क्षण20:20
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
मकर संक्रांति की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंमकर संक्रांति — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति प्रायः एक ही तारीख को क्यों पड़ती है?
यह सौर पर्व है, जो सूर्य के निरयण मकर-प्रवेश से निश्चित होता है, किसी चंद्र तिथि से नहीं। चंद्र-पर्व सिविल कैलेंडर के सापेक्ष खिसकते हैं; यह नहीं।
पुण्य काल क्या है?
संक्रांति के क्षण से गिनी जाने वाली वह पुण्य-अवधि जिसमें स्नान और दान पर्व का पूर्ण फल देते हैं। संक्रांति सूर्यास्त के पश्चात हो तो यह अगले प्रातः चली जाती है।
इस दिन तिल और गुड़ क्यों दिए जाते हैं?
तिल-गुड़ इस भाव से बाँटे जाते हैं कि देने और लेने वाले के बीच वाणी मधुर रहे। दान — तिल, गुड़, कंबल अथवा अन्न का — इस दिन का केंद्रीय कर्म है।
2023 के अन्य प्रमुख पर्व
- वसंत पंचमी — 26 जनवरी 2023
- महाशिवरात्रि — 18 फ़रवरी 2023
- होलिका दहन — 7 मार्च 2023
- होली — 8 मार्च 2023
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ — 22 मार्च 2023
- राम नवमी — 30 मार्च 2023
- अक्षय तृतीया — 22 अप्रैल 2023
- जगन्नाथ रथ यात्रा — 20 जून 2023
- गुरु पूर्णिमा — 3 जुलाई 2023
- नाग पंचमी — 21 अगस्त 2023
- रक्षा बंधन — 31 अगस्त 2023
- कृष्ण जन्माष्टमी — 6 सितंबर 2023
- हरतालिका तीज — 18 सितंबर 2023
- गणेश चतुर्थी — 19 सितंबर 2023
- अनंत चतुर्दशी — 28 सितंबर 2023
- पितृ पक्ष प्रारंभ — 29 सितंबर 2023
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ — 15 अक्टूबर 2023
- दुर्गा अष्टमी — 22 अक्टूबर 2023
- महानवमी — 23 अक्टूबर 2023
- दशहरा / विजयादशमी — 24 अक्टूबर 2023
- करवा चौथ — 1 नवंबर 2023
- धनतेरस — 10 नवंबर 2023
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — 12 नवंबर 2023
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 12 नवंबर 2023
- गोवर्धन पूजा — 14 नवंबर 2023
- भाई दूज — 14 नवंबर 2023
- छठ पूजा — 19 नवंबर 2023
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — 27 नवंबर 2023
- गुरु नानक जयंती — 27 नवंबर 2023
- हिंदू पर्व-त्योहार 2023 →