नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 1978
सूर्योदय पूर्व अभ्यंग स्नान; नरकासुर पर कृष्ण की विजय।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:04
- सूर्यास्त17:18
- व्रत अवधि (तिथि)02:57 → 1978-10-31 · 02:36
- पारण (तिथि समाप्ति)02:361978-10-31
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंनरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी कब मनाई जाती है?
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को, शरद ऋतु में — कृष्ण पक्ष का चौदहवाँ दिन, दीपावली से एक दिन पूर्व। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
अभ्यंग स्नान क्या है?
नरक चतुर्दशी को सूर्योदय से पूर्व किया जाने वाला वह स्नान, जो शरीर पर तेल और उबटन मलने के पश्चात होता है। यह वर्ष भर की संचित अशुभता को धो देने वाला माना जाता है, ताकि मनुष्य स्वच्छ होकर दीपावली में प्रवेश करे — इसी से नाम रूप चौदस।
इस दिन यम के लिए दीप क्यों जलाया जाता है?
संध्या को यम, मृत्यु के देवता, के निमित्त दीप जलाया जाता है, प्रायः दक्षिण की ओर, अकाल मृत्यु के विरुद्ध प्रार्थना सहित। यह कृष्ण द्वारा मुक्त बंदियों की स्मृति के साथ रहता है।
छोटी दिवाली दीपावली से किस प्रकार जुड़ी है?
नरक चतुर्दशी दीपावली की संध्या है; दोनों संध्याएँ साथ चलती हैं, दोनों पर दीप जलते हैं। छोटी दिवाली प्रातःकालीन स्नान और नरकासुर की पराजय पर केंद्रित है, और अगली रात्रि दीपावली लक्ष्मी पूजन पर।