पर्व कैलेंडर

रक्षा बंधन 1933

श्रावण पूर्णिमा को बहनें राखी बाँधती हैं (भद्रा रहित काल में)।

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रक्षा बंधन 1933 तिथि
शनिवार, 5 अगस्त 1933
तिथि: श्रावण पूर्णिमा
तिथि अवधि: 03:56 AM, शनिवार, 5 अगस्त 1933 → 01:02 AM, रविवार, 6 अगस्त 1933

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:27
  • सूर्यास्त18:40
  • व्रत अवधि (तिथि)03:56 → 1933-08-06 · 01:02
  • पारण (तिथि समाप्ति)01:021933-08-06

पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

रक्षा बंधन की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

रक्षा बंधन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भद्रा काल में राखी बाँधी जा सकती है?

नहीं। इस कर्म हेतु भद्रा पूर्णतः वर्जित है। श्रावण पूर्णिमा प्रायः भद्रा के साथ आरंभ होती है, अतः मुहूर्त प्रायः अपराह्न में खुलता है — अपराह्न श्रेष्ठ, प्रदोष विकल्प।

राखी किस कलाई पर बाँधी जाती है?

दाहिनी कलाई पर, जब भाई पूर्वाभिमुख बैठा हो और बहन पश्चिमाभिमुख हो।

क्या रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के लिए है?

व्यवहार में प्रायः हाँ। प्राचीन ग्रंथों में रक्षा सूत्र पुरोहित द्वारा यजमान को और पत्नी द्वारा पति को भी बाँधा जाता था — जो भी रक्षा दे या माँगे।