वसंत पंचमी 2087
सरस्वती पूजा — विद्या, संगीत और वसंत के आगमन का दिन।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:38
- सूर्यास्त17:45
- व्रत अवधि (तिथि)08:01 → 2087-02-08 · 05:30
- पारण (तिथि समाप्ति)05:302087-02-08
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
वसंत पंचमी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंवसंत पंचमी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वसंत पंचमी कब मनाई जाती है?
माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को, शीत के अंत में जब वसंत आरंभ होता है — शुक्ल पक्ष का पाँचवाँ दिन। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
वसंत पंचमी से पीला रंग क्यों जुड़ा है?
पीला उस वसंत का प्रतीक है जिसका पर्व स्वागत करता है — खिले सरसों के खेत और ऋतु का परिपक्व होता प्रकाश। लोग देवी के सम्मान में पीले वस्त्र धारण करते, पीले पुष्प अर्पित करते और पीला भोजन बनाते हैं।
वसंत पंचमी विद्यारंभ हेतु शुभ क्यों है?
यह सरस्वती का दिन है और अबूझ मुहूर्त माना जाता है, ऐसा शुभ दिन जिसे और गणना की आवश्यकता नहीं। परंपरा से बच्चों को लेखन की प्रथम शिक्षा (विद्यारंभ) दी जाती है, और नई विद्या तथा कार्य आरंभ किए जाते हैं।
वसंत पंचमी को किस देवी की पूजा होती है?
सरस्वती, विद्या, वाणी, संगीत और कलाओं की देवी। विद्यार्थी और कलाकार अपनी पुस्तकें और वाद्य उनके सम्मुख रखते हैं, और उन्हें ज्ञान तथा उसकी स्पष्ट अभिव्यक्ति के स्रोत रूप में पूजते हैं।