आषाढ़ मास · भगवान विष्णु

आषाढ़ 1962 आरंभ व समाप्ति तिथि (आषाढ़ मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): मंगलवार, 19 जून 1962मंगलवार, 17 जुलाई 1962

अमांत क्षेत्र: सोमवार, 2 जुलाई 1962मंगलवार, 31 जुलाई 1962

चातुर्मास के आरंभ का मास — जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी।

आषाढ़ 2026 देखें — इस वर्ष

आषाढ़ (आषाढ़ मास) 1962 तिथियाँ

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगलवार, 19 जून 1962
से मंगलवार, 17 जुलाई 1962 · 29 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
सोमवार, 2 जुलाई 1962
से मंगलवार, 31 जुलाई 1962 · 30 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में आषाढ़ अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

आषाढ़ का महत्व — भगवान विष्णु

आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।

आषाढ़ के अनुष्ठान

  • देवशयनी एकादशी — चातुर्मास व्रतों का आरंभ
  • पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा
  • गुरु पूर्णिमा — गुरु और व्यास की पूजा
  • चातुर्मास का कोई अनुशासन या व्रत धारण करना
  • दीक्षितों हेतु गुप्त नवरात्रि
  • योगिनी और देवशयनी एकादशी का व्रत

आषाढ़ 1962 के प्रमुख दिन

आषाढ़ 1962 के पर्व

मासिक व्रत 1962

आषाढ़ 1962 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ मास 1962 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में आषाढ़ मंगलवार, 19 जून 1962 से मंगलवार, 17 जुलाई 1962 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह सोमवार, 2 जुलाई 1962 से मंगलवार, 31 जुलाई 1962 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में आषाढ़ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

आषाढ़ 1962 किसे समर्पित है?

आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।

क्या आषाढ़ 1962 अधिक मास है?

नहीं। आषाढ़ 1962 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।