चैत्र मास · देवी दुर्गा एवं भगवान राम

चैत्र 1952 आरंभ व समाप्ति तिथि (चैत्र मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): बुधवार, 12 मार्च 1952गुरुवार, 10 अप्रैल 1952

अमांत क्षेत्र: बुधवार, 26 मार्च 1952गुरुवार, 24 अप्रैल 1952

हिंदू नववर्ष का प्रथम मास — चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा/उगादी और राम नवमी।

चैत्र 2026 देखें — इस वर्ष

चैत्र 1952 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
बुधवार, 12 मार्च 1952
से गुरुवार, 10 अप्रैल 1952 · 30 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
बुधवार, 26 मार्च 1952
से गुरुवार, 24 अप्रैल 1952 · 30 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
पूर्णिमा
गुरु, 10 अप्रैल
अमावस्या
मंगल, 25 मार्च
अमांत क्षेत्र
चैत्र शिवरात्रि
बुध, 23 अप्रैल
पूर्णिमा
गुरु, 10 अप्रैल
अमावस्या
गुरु, 24 अप्रैल
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में चैत्र अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

चैत्र का महत्व — देवी दुर्गा एवं भगवान राम

चैत्र हिंदू चंद्र-वर्ष को खोलता है। इसका शुक्ल प्रतिपदा भारत के अधिकांश भाग में नववर्ष है — गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंड — और इसके प्रथम नौ दिन चैत्र (वासंत) नवरात्रि हैं, जो राम नवमी पर राम-जन्म में समाप्त होते हैं। यह आरंभों का वसंत-मास है: उगादी का नीम-गुड़ वर्ष के कड़वे-मीठे को साथ चखता है।

चैत्र के अनुष्ठान

  • चैत्र नवरात्रि — नौ दिन दुर्गा पूजा और व्रत
  • घटस्थापना और जौ की बुवाई
  • गुड़ी पड़वा / उगादी / चेटी चंड नववर्ष अनुष्ठान
  • राम नवमी — राम का मध्याह्न जन्म
  • पूर्णिमा को हनुमान जयंती
  • नववर्ष प्रातः नीम-गुड़

चैत्र 1952 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

चैत्र 1952 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (बुध, 12 मार्च – गुरु, 10 अप्रैल) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

अमांत चैत्र में अतिरिक्त (बुध, 26 मार्च – गुरु, 24 अप्रैल)

मासिक व्रत 1952

चैत्र 1952 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चैत्र मास 1952 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में चैत्र बुधवार, 12 मार्च 1952 से गुरुवार, 10 अप्रैल 1952 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह बुधवार, 26 मार्च 1952 से गुरुवार, 24 अप्रैल 1952 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में चैत्र की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

चैत्र 1952 किसे समर्पित है?

चैत्र हिंदू चंद्र-वर्ष को खोलता है। इसका शुक्ल प्रतिपदा भारत के अधिकांश भाग में नववर्ष है — गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंड — और इसके प्रथम नौ दिन चैत्र (वासंत) नवरात्रि हैं, जो राम नवमी पर राम-जन्म में समाप्त होते हैं। यह आरंभों का वसंत-मास है: उगादी का नीम-गुड़ वर्ष के कड़वे-मीठे को साथ चखता है।

चैत्र 1952 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र गुरुवार, 10 अप्रैल 1952 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह गुरुवार, 24 अप्रैल 1952 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। चैत्र मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और चैत्र उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या चैत्र 1952 अधिक मास है?

नहीं। चैत्र 1952 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।