चैत्र 1954 आरंभ व समाप्ति तिथि (चैत्र मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शनिवार, 20 मार्च 1954 – रविवार, 18 अप्रैल 1954
अमांत क्षेत्र: रविवार, 4 अप्रैल 1954 – रविवार, 2 मई 1954
हिंदू नववर्ष का प्रथम मास — चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा/उगादी और राम नवमी।
चैत्र 1954 एक नज़र में
- चैत्र शिवरात्रि
- शुक्र, 2 अप्रैल
- पूर्णिमा
- रवि, 18 अप्रैल
- अमावस्या
- शनि, 3 अप्रैल
- पूर्णिमा
- रवि, 18 अप्रैल
- अमावस्या
- रवि, 2 मई
चैत्र का महत्व — देवी दुर्गा एवं भगवान राम
चैत्र हिंदू चंद्र-वर्ष को खोलता है। इसका शुक्ल प्रतिपदा भारत के अधिकांश भाग में नववर्ष है — गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंड — और इसके प्रथम नौ दिन चैत्र (वासंत) नवरात्रि हैं, जो राम नवमी पर राम-जन्म में समाप्त होते हैं। यह आरंभों का वसंत-मास है: उगादी का नीम-गुड़ वर्ष के कड़वे-मीठे को साथ चखता है।
चैत्र के अनुष्ठान
- चैत्र नवरात्रि — नौ दिन दुर्गा पूजा और व्रत
- घटस्थापना और जौ की बुवाई
- गुड़ी पड़वा / उगादी / चेटी चंड नववर्ष अनुष्ठान
- राम नवमी — राम का मध्याह्न जन्म
- पूर्णिमा को हनुमान जयंती
- नववर्ष प्रातः नीम-गुड़
चैत्र 1954 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शनि, 20 मार्च – रवि, 18 अप्रैल · 30 दिन
अमांत क्षेत्र
रवि, 4 अप्रैल – रवि, 2 मई · 29 दिन
चैत्र 1954 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (शनि, 20 मार्च – रवि, 18 अप्रैल) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
मासिक व्रत 1954
चैत्र 1954 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चैत्र मास 1954 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में चैत्र शनिवार, 20 मार्च 1954 से रविवार, 18 अप्रैल 1954 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह रविवार, 4 अप्रैल 1954 से रविवार, 2 मई 1954 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में चैत्र की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
चैत्र 1954 किसे समर्पित है?
चैत्र हिंदू चंद्र-वर्ष को खोलता है। इसका शुक्ल प्रतिपदा भारत के अधिकांश भाग में नववर्ष है — गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंड — और इसके प्रथम नौ दिन चैत्र (वासंत) नवरात्रि हैं, जो राम नवमी पर राम-जन्म में समाप्त होते हैं। यह आरंभों का वसंत-मास है: उगादी का नीम-गुड़ वर्ष के कड़वे-मीठे को साथ चखता है।
चैत्र शिवरात्रि 1954 कब है?
चैत्र शिवरात्रि 1954 — चैत्र मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में शुक्रवार, 2 अप्रैल 1954 को है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
चैत्र 1954 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र रविवार, 18 अप्रैल 1954 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह रविवार, 2 मई 1954 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। चैत्र मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और चैत्र उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या चैत्र 1954 अधिक मास है?
नहीं। चैत्र 1954 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।