कार्तिक मास · भगवान विष्णु (दामोदर)

कार्तिक 1955 आरंभ व समाप्ति तिथि (कार्तिक मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): मंगलवार, 1 नवंबर 1955मंगलवार, 29 नवंबर 1955

अमांत क्षेत्र: मंगलवार, 15 नवंबर 1955बुधवार, 14 दिसंबर 1955

विष्णु का सर्वाधिक पवित्र मास — कार्तिक स्नान, दामोदर दीप-दान, दीवाली, छठ और तुलसी विवाह।

कार्तिक 2026 देखें — इस वर्ष

कार्तिक 1955 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगलवार, 1 नवंबर 1955
से मंगलवार, 29 नवंबर 1955 · 29 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
मंगलवार, 15 नवंबर 1955
से बुधवार, 14 दिसंबर 1955 · 30 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
कार्तिक शिवरात्रि
रवि, 13 नव॰
पूर्णिमा
मंगल, 29 नव॰
अमावस्या
सोम, 14 नव॰
अमांत क्षेत्र
कार्तिक शिवरात्रि
मंगल, 13 दिस॰
पूर्णिमा
मंगल, 29 नव॰
अमावस्या
बुध, 14 दिस॰
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में कार्तिक अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

कार्तिक का महत्व — भगवान विष्णु (दामोदर)

कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।

कार्तिक के अनुष्ठान

  • कार्तिक स्नान — मास भर भोर-पूर्व पवित्र स्नान
  • प्रतिदिन दीप-दान (दीप जलाना या प्रवाहित करना)
  • प्रति संध्या तुलसी पूजा और एकादशी को तुलसी विवाह
  • दामोदर-अष्टकम का पाठ
  • दोनों एकादशियों (देवउठनी और कार्तिक) का व्रत
  • कार्तिक पूर्णिमा को घाटों पर देव दीपावली

कार्तिक 1955 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

कार्तिक 1955 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (मंगल, 1 नव॰ – मंगल, 29 नव॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

मासिक व्रत 1955

कार्तिक 1955 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिक मास 1955 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में कार्तिक मंगलवार, 1 नवंबर 1955 से मंगलवार, 29 नवंबर 1955 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 15 नवंबर 1955 से बुधवार, 14 दिसंबर 1955 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में कार्तिक की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

कार्तिक 1955 किसे समर्पित है?

कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।

कार्तिक शिवरात्रि 1955 कब है?

कार्तिक शिवरात्रि 1955 — कार्तिक मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में रविवार, 13 नवंबर 1955 को है। अमांत क्षेत्रों में यह मंगलवार, 13 दिसंबर 1955 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

कार्तिक 1955 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक मंगलवार, 29 नवंबर 1955 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह बुधवार, 14 दिसंबर 1955 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। कार्तिक मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और कार्तिक उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या कार्तिक 1955 अधिक मास है?

नहीं। कार्तिक 1955 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।