माघ 1907 आरंभ व समाप्ति तिथि (माघ मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): मंगलवार, 1 जनवरी 1907 – मंगलवार, 29 जनवरी 1907
अमांत क्षेत्र: मंगलवार, 15 जनवरी 1907 – मंगलवार, 12 फ़रवरी 1907
माघ स्नान और कल्पवास का मास — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी।
माघ 1907 एक नज़र में
- माघ शिवरात्रि
- रवि, 13 जन॰
- पूर्णिमा
- मंगल, 29 जन॰
- अमावस्या
- सोम, 14 जन॰
- माघ शिवरात्रि
- सोम, 11 फ़र॰
- पूर्णिमा
- मंगल, 29 जन॰
- अमावस्या
- मंगल, 12 फ़र॰
माघ का महत्व — भगवान विष्णु एवं सूर्य
माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।
माघ के अनुष्ठान
- माघ स्नान — प्रतिदिन भोर-पूर्व पवित्र स्नान, विशेषतः प्रयाग में
- कल्पवास — संगम पर मास-पर्यंत तपमय निवास
- तिल-गुड़ दान और तिल अर्पण
- मकर संक्रांति से सूर्य अर्घ्य
- मौन मौनी अमावस्या स्नान
- वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा
- जया और विजया एकादशी का व्रत
माघ 1907 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगल, 1 जन॰ – मंगल, 29 जन॰ · 29 दिन
अमांत क्षेत्र
मंगल, 15 जन॰ – मंगल, 12 फ़र॰ · 29 दिन
माघ 1907 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (मंगल, 1 जन॰ – मंगल, 29 जन॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
मासिक व्रत 1907
माघ 1907 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माघ मास 1907 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में माघ मंगलवार, 1 जनवरी 1907 से मंगलवार, 29 जनवरी 1907 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 15 जनवरी 1907 से मंगलवार, 12 फ़रवरी 1907 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में माघ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
माघ 1907 किसे समर्पित है?
माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।
माघ शिवरात्रि 1907 कब है?
माघ शिवरात्रि 1907 — माघ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में रविवार, 13 जनवरी 1907 को है। अमांत क्षेत्रों में यह सोमवार, 11 फ़रवरी 1907 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
माघ 1907 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ मंगलवार, 29 जनवरी 1907 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह मंगलवार, 12 फ़रवरी 1907 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। माघ मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और माघ उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या माघ 1907 अधिक मास है?
नहीं। माघ 1907 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।