वैशाख 1920 आरंभ व समाप्ति तिथि (वैशाख मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): रविवार, 4 अप्रैल 1920 – सोमवार, 3 मई 1920
अमांत क्षेत्र: सोमवार, 19 अप्रैल 1920 – मंगलवार, 18 मई 1920
अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा का मास — पवित्र स्नान और अक्षय पुण्य का।
वैशाख 1920 एक नज़र में
- पूर्णिमा
- रवि, 2 मई
- अमावस्या
- रवि, 18 अप्रैल
- वैशाख शिवरात्रि
- सोम, 17 मई
- पूर्णिमा
- रवि, 2 मई
- अमावस्या
- मंगल, 18 मई
वैशाख का महत्व — भगवान विष्णु (मधुसूदन)
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
वैशाख के अनुष्ठान
- वैशाख स्नान — मास भर प्रतिदिन पवित्र स्नान
- अक्षय तृतीया — आरंभ, स्वर्ण और दान
- दान में जल, सत्तू और शीतल पदार्थ
- सीता नवमी और नरसिंह जयंती व्रत
- बुद्ध पूर्णिमा पूजा और स्नान
- वरूथिनी और मोहिनी एकादशी का व्रत
वैशाख 1920 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
रवि, 4 अप्रैल – सोम, 3 मई · 30 दिन
अमांत क्षेत्र
सोम, 19 अप्रैल – मंगल, 18 मई · 30 दिन
वैशाख 1920 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (रवि, 4 अप्रैल – सोम, 3 मई) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
अमांत वैशाख में अतिरिक्त (सोम, 19 अप्रैल – मंगल, 18 मई)
मासिक व्रत 1920
वैशाख 1920 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैशाख मास 1920 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में वैशाख रविवार, 4 अप्रैल 1920 से सोमवार, 3 मई 1920 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह सोमवार, 19 अप्रैल 1920 से मंगलवार, 18 मई 1920 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में वैशाख की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
वैशाख 1920 किसे समर्पित है?
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
वैशाख 1920 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख सोमवार, 3 मई 1920 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह मंगलवार, 18 मई 1920 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। वैशाख मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और वैशाख उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या वैशाख 1920 अधिक मास है?
नहीं। वैशाख 1920 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।