वैशाख मास · भगवान विष्णु (मधुसूदन)

वैशाख 1931 आरंभ व समाप्ति तिथि (वैशाख मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शुक्रवार, 3 अप्रैल 1931शनिवार, 2 मई 1931

अमांत क्षेत्र: रविवार, 19 अप्रैल 1931रविवार, 17 मई 1931

अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा का मास — पवित्र स्नान और अक्षय पुण्य का।

वैशाख 2026 देखें — इस वर्ष

वैशाख 1931 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शुक्रवार, 3 अप्रैल 1931
से शनिवार, 2 मई 1931 · 30 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
रविवार, 19 अप्रैल 1931
से रविवार, 17 मई 1931 · 29 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
वैशाख शिवरात्रि
गुरु, 16 अप्रैल
पूर्णिमा
शनि, 2 मई
अमावस्या
शुक्र, 17 अप्रैल
अमांत क्षेत्र
वैशाख शिवरात्रि
शनि, 16 मई
पूर्णिमा
शनि, 2 मई
अमावस्या
रवि, 17 मई
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में वैशाख अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

वैशाख का महत्व — भगवान विष्णु (मधुसूदन)

वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।

वैशाख के अनुष्ठान

  • वैशाख स्नान — मास भर प्रतिदिन पवित्र स्नान
  • अक्षय तृतीया — आरंभ, स्वर्ण और दान
  • दान में जल, सत्तू और शीतल पदार्थ
  • सीता नवमी और नरसिंह जयंती व्रत
  • बुद्ध पूर्णिमा पूजा और स्नान
  • वरूथिनी और मोहिनी एकादशी का व्रत

वैशाख 1931 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

वैशाख 1931 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (शुक्र, 3 अप्रैल – शनि, 2 मई) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

अमांत वैशाख में अतिरिक्त (रवि, 19 अप्रैल – रवि, 17 मई)

मासिक व्रत 1931

वैशाख 1931 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैशाख मास 1931 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में वैशाख शुक्रवार, 3 अप्रैल 1931 से शनिवार, 2 मई 1931 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह रविवार, 19 अप्रैल 1931 से रविवार, 17 मई 1931 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में वैशाख की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

वैशाख 1931 किसे समर्पित है?

वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।

वैशाख शिवरात्रि 1931 कब है?

वैशाख शिवरात्रि 1931 — वैशाख मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में गुरुवार, 16 अप्रैल 1931 को है। अमांत क्षेत्रों में यह शनिवार, 16 मई 1931 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

वैशाख 1931 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख शनिवार, 2 मई 1931 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह रविवार, 17 मई 1931 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। वैशाख मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और वैशाख उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या वैशाख 1931 अधिक मास है?

नहीं। वैशाख 1931 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।