मुहूर्त और समय7 मिनट पढ़ें

तिथि कैलेंडर: चंद्र तिथियाँ और उनका जीवन में महत्व

हिंदू पंचांग में तिथि क्या होती है? 30 तिथियों का महत्व, शुभाशुभ तिथियाँ, एकादशी व्रत और दैनिक जीवन में तिथि का उपयोग।

तिथि क्या होती है?

तिथि हिंदू पंचांग का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर से निर्धारित होती है। जब यह अंतर 12° होता है तो एक तिथि पूर्ण होती है।

एक चंद्र माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या तक) में। तिथियों को उनके देवता, स्वभाव और शुभाशुभता के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

30 तिथियाँ और उनका महत्व

प्रतिपदा: ब्रह्मा — नई शुरुआत के लिए मध्यम द्वितीया: विधाता — यात्रा और नए कार्यों के लिए शुभ तृतीया: गौरी — विवाह और वस्त्र-आभूषण के लिए शुभ चतुर्थी: गणेश — गणेश पूजा, बाधा निवारण पंचमी: नाग — शिक्षा आरंभ के लिए उत्तम षष्ठी: कार्तिकेय — युद्ध, साहसिक कार्य सप्तमी: सूर्य — यात्रा, वाहन खरीद के लिए शुभ अष्टमी: शिव/दुर्गा — शस्त्र-विद्या, महत्वपूर्ण नवमी — अशुभ, नए कार्यों से बचें दशमी: धर्मराज — कानूनी कार्य, दान एकादशी: विष्णु — व्रत, आध्यात्मिक कार्य, अत्यंत शुभ द्वादशी: विष्णु — दान, धार्मिक अनुष्ठान त्रयोदशी: मदन — विवाह, प्रेम, शुभ चतुर्दशी — शिव/काली — मिश्रित पूर्णिमा/अमावस्या — विशेष महत्व

एकादशी का विशेष महत्व

एकादशी प्रत्येक पक्ष की 11वीं तिथि है और वैष्णव परंपरा में इसे सबसे पवित्र तिथि माना जाता है। वर्ष भर में 24 एकादशियाँ होती हैं — प्रत्येक का अपना नाम और महत्व है।

एकादशी व्रत: इस दिन अन्न का त्याग करके फलाहार किया जाता है। विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ विशेष फलदायी है। एकादशी को नए कार्य, शुभ यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

अपनी कुंडली जानना चाहते हैं?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या तिथि और तारीख एक साथ बदलती है?

नहीं। तिथि चंद्र गति पर आधारित है और एक दिन में एक या दो तिथियाँ हो सकती हैं। कभी-कभी एक तिथि दो दिन भी रहती है।

कौन सी तिथियाँ विवाह के लिए शुभ हैं?

द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी विवाह के लिए शुभ मानी जाती हैं।