गीता जयंती 1934
कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश — मोक्षदा एकादशी।
मुहूर्त और समय
काशी/IST · खगोलीय गणना- संकल्प (सूर्योदय)06:36
- सूर्यास्त17:10
- व्रत अवधि (तिथि)01:10 → 1934-12-17 · 00:35
- पारण (तिथि समाप्ति)00:351934-12-17
पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
गीता जयंती की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ेंगीता जयंती — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गीता जयंती कब है?
मार्गशीर्ष की शुक्ल एकादशी को, जो मोक्षदा एकादशी भी है, प्रायः नवंबर–दिसंबर में। यह उस दिन को दर्शाती है जब कुरुक्षेत्र पर भगवद्गीता कही गई। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।
गीता जयंती पर क्या मनाया जाता है?
भगवद्गीता का 'जन्म' — वह दिन जब कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र पर अर्जुन को उसके सात सौ श्लोक कहे। यह वह विरल पर्व है जो एक ग्रंथ और एक शिक्षा के संसार में आने का उत्सव करता है।
गीता जयंती कैसे मनाई जाती है?
गीता की पूजा और पाठ से — आदर्शतः अठारहों अध्याय — उसके उपदेश पर मनन, सारथी कृष्ण की पूजा, और मोक्षदा एकादशी व्रत रखकर। गीता भेंट (गीता-दान) विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी क्या है?
वह एकादशी जो गीता जयंती से मेल खाती है, 'मोक्ष देने वाली', एक विष्णु व्रत रूप में रखी जिसका पुण्य पितरों को मुक्त करता कहा जाता है। दोनों अनुष्ठान एक ही दिन साझा करते हैं।