पर्व कैलेंडर

होली 1934

रंगों का पर्व (धुलंडी) — होलिका दहन के अगले दिन, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को।

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होली 1934 तिथि
गुरुवार, 1 मार्च 1934
तिथि: होलिका दहन के अगले दिन

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)06:20
  • सूर्यास्त18:00

पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

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होली — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन में भद्रा से क्यों बचा जाता है?

भद्रा (विष्टि करण) शुभ अग्नि-कर्मों को दूषित करने वाली मानी जाती है। दहन प्रदोष काल में तभी होता है जब भद्रा बीत चुकी हो; यदि भद्रा सम्पूर्ण संध्या घेरे, तो दहन रात्रि में किया जाता है।

होली एक दिन की है या दो?

दो दिन। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को; रंगवाली होली अगले प्रातः, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को।

होलिका की भस्म का क्या किया जाता है?

अगले प्रातः रंग आरंभ होने से पूर्व वह मस्तक पर लगाई जाती है, इस भाव से कि जो बीत गया वह अग्नि को समर्पित हो चुका।