कार्तिक 1934 आरंभ व समाप्ति तिथि (कार्तिक मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): मंगलवार, 23 अक्टूबर 1934 – बुधवार, 21 नवंबर 1934
अमांत क्षेत्र: गुरुवार, 8 नवंबर 1934 – गुरुवार, 6 दिसंबर 1934
विष्णु का सर्वाधिक पवित्र मास — कार्तिक स्नान, दामोदर दीप-दान, दीवाली, छठ और तुलसी विवाह।
कार्तिक 1934 एक नज़र में
- कार्तिक शिवरात्रि
- मंगल, 6 नव॰
- पूर्णिमा
- बुध, 21 नव॰
- अमावस्या
- बुध, 7 नव॰
- कार्तिक शिवरात्रि
- बुध, 5 दिस॰
- पूर्णिमा
- बुध, 21 नव॰
- अमावस्या
- गुरु, 6 दिस॰
कार्तिक का महत्व — भगवान विष्णु (दामोदर)
कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।
कार्तिक के अनुष्ठान
- कार्तिक स्नान — मास भर भोर-पूर्व पवित्र स्नान
- प्रतिदिन दीप-दान (दीप जलाना या प्रवाहित करना)
- प्रति संध्या तुलसी पूजा और एकादशी को तुलसी विवाह
- दामोदर-अष्टकम का पाठ
- दोनों एकादशियों (देवउठनी और कार्तिक) का व्रत
- कार्तिक पूर्णिमा को घाटों पर देव दीपावली
कार्तिक 1934 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
मंगल, 23 अक्टू॰ – बुध, 21 नव॰ · 30 दिन
अमांत क्षेत्र
गुरु, 8 नव॰ – गुरु, 6 दिस॰ · 29 दिन
कार्तिक 1934 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (मंगल, 23 अक्टू॰ – बुध, 21 नव॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
- करवा चौथ — गुरु, 25 अक्टू॰
- अहोई अष्टमी — मंगल, 30 अक्टू॰
- धनतेरस — रवि, 4 नव॰
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) — मंगल, 6 नव॰
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — मंगल, 6 नव॰
- गोवर्धन पूजा — बुध, 7 नव॰
- भाई दूज — गुरु, 8 नव॰
- छठ पूजा — सोम, 12 नव॰
- देवउठनी एकादशी — शनि, 17 नव॰
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) — बुध, 21 नव॰
- गुरु नानक जयंती — बुध, 21 नव॰
मासिक व्रत 1934
कार्तिक 1934 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिक मास 1934 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में कार्तिक मंगलवार, 23 अक्टूबर 1934 से बुधवार, 21 नवंबर 1934 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह गुरुवार, 8 नवंबर 1934 से गुरुवार, 6 दिसंबर 1934 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में कार्तिक की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
कार्तिक 1934 किसे समर्पित है?
कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।
कार्तिक शिवरात्रि 1934 कब है?
कार्तिक शिवरात्रि 1934 — कार्तिक मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मंगलवार, 6 नवंबर 1934 को है। अमांत क्षेत्रों में यह बुधवार, 5 दिसंबर 1934 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
कार्तिक 1934 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक बुधवार, 21 नवंबर 1934 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह गुरुवार, 6 दिसंबर 1934 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। कार्तिक मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और कार्तिक उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या कार्तिक 1934 अधिक मास है?
नहीं। कार्तिक 1934 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।