माघ 1942 आरंभ व समाप्ति तिथि (माघ मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शनिवार, 3 जनवरी 1942 – रविवार, 1 फ़रवरी 1942
अमांत क्षेत्र: शनिवार, 17 जनवरी 1942 – रविवार, 15 फ़रवरी 1942
माघ स्नान और कल्पवास का मास — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी।
माघ 1942 एक नज़र में
- माघ शिवरात्रि
- शुक्र, 16 जन॰
- पूर्णिमा
- रवि, 1 फ़र॰
- अमावस्या
- —
- माघ शिवरात्रि
- शनि, 14 फ़र॰
- पूर्णिमा
- रवि, 1 फ़र॰
- अमावस्या
- रवि, 15 फ़र॰
माघ का महत्व — भगवान विष्णु एवं सूर्य
माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।
माघ के अनुष्ठान
- माघ स्नान — प्रतिदिन भोर-पूर्व पवित्र स्नान, विशेषतः प्रयाग में
- कल्पवास — संगम पर मास-पर्यंत तपमय निवास
- तिल-गुड़ दान और तिल अर्पण
- मकर संक्रांति से सूर्य अर्घ्य
- मौन मौनी अमावस्या स्नान
- वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा
- जया और विजया एकादशी का व्रत
माघ 1942 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शनि, 3 जन॰ – रवि, 1 फ़र॰ · 30 दिन
अमांत क्षेत्र
शनि, 17 जन॰ – रवि, 15 फ़र॰ · 30 दिन
माघ 1942 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (शनि, 3 जन॰ – रवि, 1 फ़र॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
अमांत माघ में अतिरिक्त (शनि, 17 जन॰ – रवि, 15 फ़र॰)
मासिक व्रत 1942
माघ 1942 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माघ मास 1942 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में माघ शनिवार, 3 जनवरी 1942 से रविवार, 1 फ़रवरी 1942 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह शनिवार, 17 जनवरी 1942 से रविवार, 15 फ़रवरी 1942 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में माघ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
माघ 1942 किसे समर्पित है?
माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।
माघ शिवरात्रि 1942 कब है?
माघ शिवरात्रि 1942 — माघ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में शुक्रवार, 16 जनवरी 1942 को है। अमांत क्षेत्रों में यह शनिवार, 14 फ़रवरी 1942 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
माघ 1942 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ रविवार, 1 फ़रवरी 1942 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह रविवार, 15 फ़रवरी 1942 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। माघ मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और माघ उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या माघ 1942 अधिक मास है?
नहीं। माघ 1942 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।