वैशाख 1942 आरंभ व समाप्ति तिथि (वैशाख मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): गुरुवार, 2 अप्रैल 1942 – गुरुवार, 30 अप्रैल 1942
अमांत क्षेत्र: गुरुवार, 16 अप्रैल 1942 – शुक्रवार, 15 मई 1942
अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा का मास — पवित्र स्नान और अक्षय पुण्य का।
वैशाख 1942 एक नज़र में
- वैशाख शिवरात्रि
- मंगल, 14 अप्रैल
- पूर्णिमा
- —
- अमावस्या
- बुध, 15 अप्रैल
- वैशाख शिवरात्रि
- गुरु, 14 मई
- पूर्णिमा
- —
- अमावस्या
- शुक्र, 15 मई
वैशाख का महत्व — भगवान विष्णु (मधुसूदन)
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
वैशाख के अनुष्ठान
- वैशाख स्नान — मास भर प्रतिदिन पवित्र स्नान
- अक्षय तृतीया — आरंभ, स्वर्ण और दान
- दान में जल, सत्तू और शीतल पदार्थ
- सीता नवमी और नरसिंह जयंती व्रत
- बुद्ध पूर्णिमा पूजा और स्नान
- वरूथिनी और मोहिनी एकादशी का व्रत
वैशाख 1942 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
गुरु, 2 अप्रैल – गुरु, 30 अप्रैल · 29 दिन
अमांत क्षेत्र
गुरु, 16 अप्रैल – शुक्र, 15 मई · 30 दिन
वैशाख 1942 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (गुरु, 2 अप्रैल – गुरु, 30 अप्रैल) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
मासिक व्रत 1942
वैशाख 1942 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैशाख मास 1942 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में वैशाख गुरुवार, 2 अप्रैल 1942 से गुरुवार, 30 अप्रैल 1942 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह गुरुवार, 16 अप्रैल 1942 से शुक्रवार, 15 मई 1942 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में वैशाख की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
वैशाख 1942 किसे समर्पित है?
वैशाख जल और पुण्य का मास है, जो विष्णु को मधुसूदन रूप में पूजता है। इसकी अक्षय तृतीया वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिनों में है — इस पर आरंभ, दान या क्रय किया गया कुछ भी कभी क्षीण नहीं होता माना जाता है। यह बुद्ध पूर्णिमा पर समाप्त होता है — वह पूर्णिमा जो बुद्ध के जन्म, बोधि और निर्वाण को दर्शाती है, और मास भर भोर-पूर्व वैशाख स्नान चलता है।
वैशाख शिवरात्रि 1942 कब है?
वैशाख शिवरात्रि 1942 — वैशाख मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मंगलवार, 14 अप्रैल 1942 को है। अमांत क्षेत्रों में यह गुरुवार, 14 मई 1942 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
वैशाख 1942 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख गुरुवार, 30 अप्रैल 1942 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह शुक्रवार, 15 मई 1942 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। वैशाख मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और वैशाख उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या वैशाख 1942 अधिक मास है?
नहीं। वैशाख 1942 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।