माघ मास · भगवान विष्णु एवं सूर्य

माघ 1956 आरंभ व समाप्ति तिथि (माघ मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शनिवार, 28 जनवरी 1956रविवार, 26 फ़रवरी 1956

अमांत क्षेत्र: रविवार, 12 फ़रवरी 1956सोमवार, 12 मार्च 1956

माघ स्नान और कल्पवास का मास — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी।

माघ 2026 देखें — इस वर्ष

माघ 1956 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शनिवार, 28 जनवरी 1956
से रविवार, 26 फ़रवरी 1956 · 30 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
रविवार, 12 फ़रवरी 1956
से सोमवार, 12 मार्च 1956 · 30 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
माघ शिवरात्रि
शुक्र, 10 फ़र॰
पूर्णिमा
रवि, 26 फ़र॰
अमावस्या
शनि, 11 फ़र॰
अमांत क्षेत्र
माघ शिवरात्रि
रवि, 11 मार्च
पूर्णिमा
रवि, 26 फ़र॰
अमावस्या
सोम, 12 मार्च
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में माघ अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

माघ का महत्व — भगवान विष्णु एवं सूर्य

माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।

माघ के अनुष्ठान

  • माघ स्नान — प्रतिदिन भोर-पूर्व पवित्र स्नान, विशेषतः प्रयाग में
  • कल्पवास — संगम पर मास-पर्यंत तपमय निवास
  • तिल-गुड़ दान और तिल अर्पण
  • मकर संक्रांति से सूर्य अर्घ्य
  • मौन मौनी अमावस्या स्नान
  • वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा
  • जया और विजया एकादशी का व्रत

माघ 1956 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

माघ 1956 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (शनि, 28 जन॰ – रवि, 26 फ़र॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

अमांत माघ में अतिरिक्त (रवि, 12 फ़र॰ – सोम, 12 मार्च)

मासिक व्रत 1956

माघ 1956 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माघ मास 1956 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में माघ शनिवार, 28 जनवरी 1956 से रविवार, 26 फ़रवरी 1956 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह रविवार, 12 फ़रवरी 1956 से सोमवार, 12 मार्च 1956 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में माघ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

माघ 1956 किसे समर्पित है?

माघ पवित्र स्नान का महान मास है। मास भर प्रयाग में स्नान — कल्पवास, जब भक्त संगम-तट पर तपमय जीवन बिताते हैं — जन्म-जन्मांतर के कर्म धो देता है माना जाता है। यह मकर संक्रांति से आरंभ होता है जब सूर्य उत्तरायण होता है, मौन मौनी अमावस्या स्नान धारण करता है, और वसंत पंचमी तक पहुँचता है — वसंत का प्रथम दिन और सरस्वती की पूजा।

माघ शिवरात्रि 1956 कब है?

माघ शिवरात्रि 1956 — माघ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में शुक्रवार, 10 फ़रवरी 1956 को है। अमांत क्षेत्रों में यह रविवार, 11 मार्च 1956 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

माघ 1956 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ रविवार, 26 फ़रवरी 1956 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह सोमवार, 12 मार्च 1956 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। माघ मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और माघ उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या माघ 1956 अधिक मास है?

नहीं। माघ 1956 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।