सावन 1956 आरंभ व समाप्ति तिथि (श्रावण मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): सोमवार, 23 जुलाई 1956 – मंगलवार, 21 अगस्त 1956
अमांत क्षेत्र: मंगलवार, 7 अगस्त 1956 – मंगलवार, 4 सितंबर 1956
शिव का सर्वाधिक पवित्र मास — सावन सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक का मास।
सावन (श्रावण मास) 1956 तिथियाँ
सावन का महत्व — भगवान शिव
श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।
सावन के अनुष्ठान
- प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत
- शिवलिंग का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक
- कांवड़ यात्रा — पैदल गंगाजल लाना
- बेल-पत्र, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पण
- शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ
- मंगलवार को सुहागिनों का मंगला गौरी व्रत
सावन 1956 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
सोम, 23 जुल॰ – मंगल, 21 अग॰ · 30 दिन
सावन सोमवार व्रत · 5
अमांत क्षेत्र
मंगल, 7 अग॰ – मंगल, 4 सित॰ · 29 दिन
सावन सोमवार व्रत · 4
सावन 1956 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (सोम, 23 जुल॰ – मंगल, 21 अग॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
अमांत सावन में अतिरिक्त (मंगल, 7 अग॰ – मंगल, 4 सित॰)
मासिक व्रत 1956
सावन 1956 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण मास 1956 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में सावन सोमवार, 23 जुलाई 1956 से मंगलवार, 21 अगस्त 1956 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 7 अगस्त 1956 से मंगलवार, 4 सितंबर 1956 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
सावन 1956 किसे समर्पित है?
श्रावण शिव का मास है। यह वर्षा के चरम पर पड़ता है, जब धरती हरी होती है और समुद्र-मंथन स्मरण किया जाता है — शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु इसी ऋतु में हलाहल विष पिया, और मास के जलार्पण उस जलते कंठ को शीतल करते हैं। प्रत्येक सोमवार सावन सोमवार व्रत रखा जाता है, और श्रद्धालु पैदल गंगाजल (कांवड़ यात्रा) लाकर लिंग पर चढ़ाते हैं।
सावन शिवरात्रि 1956 कब है?
सावन शिवरात्रि 1956 — श्रावण मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में रविवार, 5 अगस्त 1956 को है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
क्या सावन 1956 अधिक मास है?
नहीं। सावन 1956 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।