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अभिजित मुहूर्त: दिन का सबसे शुभ समय — गणना और महत्व

अभिजित मुहूर्त क्या है, यह कब होता है, कैसे निकालते हैं और इसमें कौन से शुभ कार्य करने चाहिए — पूरी वैदिक जानकारी।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

अभिजित मुहूर्त प्रत्येक दिन दोपहर में आने वाला वह विशेष काल है जिसे वैदिक ज्योतिष में सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। 'अभिजित' का अर्थ है 'जो जीत लेता है' — यह भगवान विष्णु का नक्षत्र है और उत्तराषाढ़ा व श्रवण नक्षत्रों के संधिकाल में आता है।

जब कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तब भी अभिजित मुहूर्त में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होता है।

अभिजित मुहूर्त का समय कैसे निकालें

अभिजित मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के 8वें भाग (मुहूर्त) के मध्य में आता है। यह सूर्य की उच्चतम स्थिति (मध्याह्न) के आसपास लगभग 24 मिनट का होता है।

सरल गणना: (सूर्योदय + सूर्यास्त) / 2 — इस मध्य समय के 12 मिनट पहले से 12 मिनट बाद तक अभिजित मुहूर्त रहता है।

भारत में सामान्यतः अभिजित मुहूर्त 11:45 बजे से 12:30 बजे के बीच होता है, लेकिन यह स्थान और ऋतु के अनुसार बदलता है।

अभिजित मुहूर्त में कौन से कार्य करें

अभिजित मुहूर्त में ये कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:

• नया व्यवसाय या दुकान का उद्घाटन • महत्वपूर्ण यात्रा का आरंभ • नई शिक्षा, पाठ्यक्रम या कोचिंग प्रारंभ • बड़े अनुबंध या सौदे पर हस्ताक्षर • किसी लंबित विवाद का समाधान

नोट: बुधवार को अभिजित मुहूर्त विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है, जबकि बुधवार के दोपहर को राहु काल के साथ जाँचना भी आवश्यक है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बुधवार को अभिजित मुहूर्त विशेष है?

हाँ, बुधवार को अभिजित मुहूर्त अत्यंत शुभ माना जाता है। बुध बुद्धि और व्यापार का कारक है और अभिजित के साथ मिलकर असाधारण फल देता है।

क्या अभिजित मुहूर्त विवाह के लिए उपयुक्त है?

अभिजित मुहूर्त सामान्य मुहूर्त के रूप में उपयुक्त है लेकिन पारंपरिक विवाह मुहूर्त के लिए लग्न शुद्धि, तिथि और विशेष विवाह मुहूर्त अलग से देखा जाता है।