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आज का राहु काल: समय, महत्व और किन कार्यों से बचें

राहु काल क्या है? सप्ताह के हर दिन के राहु काल का समय, इसका ज्योतिषीय महत्व और इस अवधि में क्या नहीं करना चाहिए — पूरी जानकारी।

राहु काल क्या है?

राहु काल (Rahu Kaal) दिन का वह काल-खंड है जिसे वैदिक ज्योतिष में अशुभ माना जाता है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में विभाजित करके निकाला जाता है, और इनमें से एक भाग राहु ग्रह से संबंधित होता है।

राहु छाया ग्रह है — चंद्रमा का उत्तरी नोड — जो अशुभ, भ्रम और अप्रत्याशित परिणामों का प्रतीक माना जाता है। राहु काल में कोई भी शुभ कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, यात्रा आरंभ — नहीं करना चाहिए।

सप्ताह के हर दिन राहु काल का समय

राहु काल का समय हर दिन बदलता है और यह आपके स्थान के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है। सामान्यतः भारतीय मानक समय (IST) के आधार पर:

सोमवार: 7:30 – 9:00 बजे मंगलवार: 3:00 – 4:30 बजे बुधवार: 12:00 – 1:30 बजे गुरुवार: 1:30 – 3:00 बजे शुक्रवार: 10:30 – 12:00 बजे शनिवार: 9:00 – 10:30 बजे रविवार: 4:30 – 6:00 बजे

ये समय अनुमानित हैं। सटीक समय के लिए अपने स्थान के सूर्योदय के अनुसार गणना करें।

राहु काल में क्या न करें

राहु काल में निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए: नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना, विवाह, सगाई या कोई भी शुभ कार्य, नई यात्रा आरंभ करना, बड़ी धनराशि का निवेश या लेन-देन, गृह प्रवेश या नई संपत्ति खरीदना, और किसी भी महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर।

हालांकि, दैनिक कार्य, भोजन, पूजा-पाठ और अध्ययन राहु काल में बाधित नहीं होते।

राहु काल की गणना कैसे होती है

राहु काल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर की जाती है। प्रत्येक भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है। राहु काल का क्रम याद रखने का सरल तरीका है: सोमवार से शुरू करते हुए 'मा-मा-सा-शु-बु-गु-शनि-सूर्य' (Moon-Mars-Saturn-Venus-Mercury-Jupiter-Saturn-Sun) के क्रम में दूसरे, आठवें, सातवें... भाग राहु काल होते हैं।

हमारा राहु काल कैलकुलेटर आपके स्थान और तारीख के आधार पर सटीक राहु काल स्वचालित रूप से दिखाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राहु काल में यात्रा बिल्कुल नहीं करनी चाहिए?

यदि पहले से नियोजित यात्रा हो या अत्यंत आवश्यक हो, तो राहु काल शुरू होने से पहले घर से निकलें और प्रस्थान कर दें। यात्रा का आरंभ राहु काल से पहले हो तो कम अशुभ माना जाता है।

राहु काल हर दिन अलग क्यों होता है?

क्योंकि राहु काल की गणना उस दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करती है, जो स्थान और ऋतु के अनुसार बदलता रहता है।

क्या राहु काल में पूजा करना उचित है?

राहु काल में नित्य पूजा और राहु से संबंधित मंत्र जप (जैसे राहु स्तोत्र) विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। शुभ कार्यों का आरंभ न करें, लेकिन नित्यकर्म बाधित न करें।

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